Life Partner Secrets
जिस औरत (या मर्द) के साथ आप सो रहे हैं, वह असल में कौन है? गरुड़ पुराण का वह रहस्य जो आपके होश उड़ा देगा
दुनिया में अरबों चेहरे हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि उस भारी भीड़ में से आपकी नजर केवल एक ही चेहरे पर क्यों रुकी? हजारों रिश्तों के बनने और बिगड़ने के बाद आखिर एक ही इंसान के साथ आपकी शादी क्यों हुई? क्या यह केवल एक संयोग है, या इसके पीछे कोई ऐसा गहरा रहस्य है जो आपके इस जन्म की यादों से बहुत परे है?
अक्सर शादी के कुछ साल बीतते ही घर के अंदर बर्तनों के टकराने की, चीखने की या एक जानलेवा खामोशी की आवाजें गूँजने लगती हैं। तब मन में सवाल आता है— “क्या मेरी किस्मत खराब थी?” लेकिन गरुड़ पुराण और कर्मों का अकाट्य सिद्धांत कहता है कि इस ब्रह्मांड में एक पत्ता भी बिना कारण के नहीं हिलता। आज हम उस पर्दे को उठाएंगे और जानेंगे कि आपका जीवनसाथी असल में कौन है।
1. रणानुबंध: पिछले जन्मों का वह अदृश्य कर्ज
गरुड़ पुराण के अनुसार, जब कोई आत्मा नया शरीर धारण करती है, तो वह अपने साथ धन या कपड़े नहीं, बल्कि एक अदृश्य पोटली लाती है जिसे ‘रणानुबंध’ कहते हैं। ‘रण’ यानी कर्ज और ‘अनुबंध’ यानी बंधन।
यह वह कर्ज है जो पिछले जन्मों में लेन-देन, भावनाओं या प्रतिशोध के रूप में अधूरा रह गया था। प्रकृति का नियम है कि कर्ज चुकाना ही पड़ता है। आप बैंक का कर्ज लेकर भाग सकते हैं, लेकिन कर्मों का कर्ज मृत्यु के पार भी आपका पीछा करता है। जब आप दोबारा जन्म लेते हैं, तो वह कर्जदार वेश बदलकर आपके सबसे करीब—आपके पति या पत्नी के रूप में आ बैठता है।
2. आपका जीवनसाथी: प्रेमी या पुराना दुश्मन?
प्रकृति अपना हिसाब बराबर करने के लिए अक्सर आपके पिछले जन्म के सबसे बड़े सुख या सबसे बड़े दुख के कारण को आपका जीवनसाथी बना देती है। शास्त्रों के अनुसार ये रिश्ते चार प्रकार के होते हैं:
क. शत्रु रण (शत्रु के रूप में साथी)
क्या आपका पार्टनर बिना बात के ताने मारता है? क्या आप उनके लिए सब कुछ करते हैं, लेकिन बदले में अपमान और तिरस्कार मिलता है? गरुड़ पुराण के अनुसार, यह वह आत्मा है जिसे पिछले जन्म में आपने बहुत सताया था। तब वह कमजोर था, लेकिन अब वह आपसे वही पीड़ा वसूल रहा है। उसकी आत्मा को शांति तभी मिलेगी जब उसका हिसाब पूरा होगा।
ख. आर्थिक रण (लेनदार के रूप में साथी)
क्या शादी के बाद अचानक आपके खर्चे बढ़ गए? पार्टनर बीमार रहने लगा या उसकी फिजूलखर्ची में आपकी कमाई जाने लगी? यह संकेत है कि पिछले जन्म में आपने उस आत्मा का धन लिया था। अब वह अधिकार से आपकी जेब से वह पैसा निकलवा रहा है।
ग. उदासीन संबंध
ऐसी शादियां जहाँ न बहुत प्यार है, न नफरत। दोनों अजनबियों की तरह एक छत के नीचे रहते हैं। यह तब होता है जब पिछले जन्म में आपका उस आत्मा के साथ कोई गहरा लेना-देना नहीं था, बस एक हल्का सा संपर्क था जिसे अब समय बिताकर पूरा किया जा रहा है।
घ. सखा रण (पुण्य अनुबंध)
यह सबसे दुर्लभ और शुभ रिश्ता है। जब आपको ऐसा साथी मिले जो बिना कहे मन की बात समझ ले और आपके दुख में ढाल बने, तो समझ लेना कि यह पिछले जन्म का कोई ऐसा मित्र या गुरु है जिसकी आपने निस्वार्थ सेवा की थी।
3. क्या हम इस चुनाव को बदल सकते थे?
विवाह उन घटनाओं में से है जो ‘प्रारब्ध’ (Fixed Karma) के अंतर्गत आती हैं। आत्मा अपने जन्म से पहले ही अपनी उन्नति के लिए जीवनसाथी का चुनाव कर लेती है।
कभी-कभी एक झगड़ालू जीवनसाथी, एक प्रेमी साथी से ज्यादा बेहतर होता है—आपकी आत्मा के विकास के लिए। यदि सब कुछ अच्छा होता, तो आप मोह-माया में फँसे रहते। लेकिन जब ठोकर मिलती है, तभी इंसान ईश्वर की ओर मुड़ता है। जैसे तुलसीदास जी को उनकी पत्नी के ताने ने ही ‘रामचरितमानस’ लिखने की प्रेरणा दी।
4. कर्म के इस चक्र को कैसे काटें?
गरुड़ पुराण यह नहीं कहता कि आप अत्याचार सहें, बल्कि यह ‘स्वीकार और सुधार’ की बात करता है। जब आप समझ लेते हैं कि सामने वाला व्यक्ति आपके ही कर्मों का ‘डाकिया’ है, जो आपके ही लिखे खत (कर्म) लाया है, तब आपकी शिकायत खत्म हो जाती है।
क्षमा की शक्ति (The Power of Forgiveness)
नफरत प्रेम से भी गहरा बंधन है। यदि आप इस जन्म में पीछा छुड़ाना चाहते हैं, तो केवल तलाक काफी नहीं है। आत्मा के स्तर पर तलाक तब होता है जब ‘क्षमा’ आती है। जिस दिन आप अपने कष्ट देने वाले साथी को मन से माफ कर देंगे और कहेंगे— “प्रभु, हमारा हिसाब आज पूरा हुआ, मैं इसे और स्वयं को मुक्त करता हूँ”—उस दिन वह अदृश्य डोर कट जाएगी।
5. जीवनसाथी: आपका सबसे बड़ा आईना
आपका जीवनसाथी आपकी अशुद्धियों, अहंकार और क्रोध को बाहर निकालने के लिए एक चुनौती की तरह है। वह आपकी आत्मा को शुद्ध करने वाला साथी (Soulmate) है। सन्यासी बनकर जंगल में शांत रहना आसान है, लेकिन गृहस्थ जीवन की खटपट के बीच मानसिक संतुलन बनाए रखना ही असली तपस्या है।
अगली बार जब आपका जीवनसाथी आपको चोट पहुँचाए, तो प्रतिक्रिया (React) मत दीजिए। बस एक गहरी साँस लीजिए और मन ही मन कहिए— “हिसाब बराबर हुआ।” आप नाटक के पात्र नहीं, दर्शक बन जाइए। याद रखिए, आप यहाँ केवल घर बसाने नहीं, बल्कि अपने असली घर (परमधाम) जाने की तैयारी करने आए हैं। प्रेम और क्षमा ही वह कैंची है जो कर्मों के इस चक्र को काट सकती है।
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