Placement of ancestors' photos
मृत पूर्वजों की फोटो घर में रखने के संबंध में गरुड़ पुराण के सिद्धांतों के आधार पर यह महत्वपूर्ण जानकारी आपके लिए यहाँ दी गई है:
अक्सर हम अपने पूर्वजों के प्रति सम्मान प्रकट करने के लिए उनकी बड़ी-बड़ी तस्वीरें घर की दीवारों या दुकान के मुख्य द्वार पर लगाते हैं। हमें लगता है कि यह उनका आशीर्वाद पाने का तरीका है, यह अनजाने में आपकी और उन मृत आत्माओं की प्रगति में बाधा बन सकता है।
1. आत्मा का मोह और प्रगति में रुकावट
एक प्रसिद्ध मिठाई की दुकान, जहाँ मालिक ने अपने पिता की फोटो मुख्य द्वार पर लगाई थी। दुकान में सब कुछ होते हुए भी प्रोग्रेस (उन्नति) रुकी हुई थी। जब उन्होंने इसे आध्यात्मिक दृष्टि से देखा, तो पाया कि उन पिता की आत्मा अभी भी वहीं खड़ी थी।
कारण: जब हम किसी की फोटो को रोज पूजते हैं या बार-बार याद करते हैं, तो उस आत्मा को लगता है कि उसकी यहाँ जरूरत है। वह “मुक्ति” के मार्ग पर आगे बढ़ने के बजाय अपने परिवार और संपत्ति के मोह में वहीं रुक जाती है।
2. फोटो रखने का सही तरीका और स्थान
पूर्वजों का सम्मान करना गलत नहीं है, लेकिन उनकी तस्वीरों को प्रदर्शन की वस्तु नहीं बनाना चाहिए।
- अंदर रखें: पूर्वजों की फोटो को घर के मुख्य हॉल या प्रवेश द्वार पर लगाने के बजाय किसी अंदर के कमरे में या अलमारी में रखें।
- बार-बार याद न करें: उन्हें रोज-रोज याद करके दुखी होना या उनका आह्वान करना उनकी आगे की यात्रा (पुनर्जन्म या मुक्ति) में रुकावट डालता है।
3. तर्पण और श्राद्ध का महत्व
आत्मा को सम्मानपूर्वक विदा करना जरूरी है। साल में एक या दो बार (जैसे श्राद्ध के समय) उन्हें श्रद्धापूर्वक याद करना और उनके नाम पर दान-पुण्य करना “तर्पण” कहलाता है। इससे आत्मा को ऊर्जा मिलती है और वह शांति से अपने अगले गंतव्य की ओर प्रस्थान कर पाती है।
4. रिवेंज (बदले) की भावना और अधूरी यात्रा
100 में से लगभग 60 आत्माएं पृथ्वी और परलोक के बीच के फ्रेम में रुक जाती हैं। विशेषकर वे आत्माएं जो किसी गहरे दुख, बदले की भावना या सुसाइड (आत्महत्या) के कारण शरीर छोड़ती हैं।
- उदाहरण: एक ऐसे व्यक्ति की कहानी जिसकी शादी नहीं हो पा रही थी क्योंकि उसके पिछले जीवन की एक प्रेमिका (जिसने उसके कारण सुसाइड किया था) की ऊर्जा आज भी उससे जुड़ी थी और उसे सफल नहीं होने दे रही थी।
5. भूत’ का असली अर्थ
‘भूत’ वही है जो ‘भूतकाल’ (Past) में जी रहा है। ऐसी आत्माएं जो अपने साथ हुए अन्याय या पुरानी यादों को नहीं छोड़ पातीं, वे वर्षों तक (कभी-कभी 400-500 साल तक) उसी ऊर्जा जोन में अटकी रहती हैं। इन्हें ही आम भाषा में भूत-प्रेत कहा जाता है।
हमें क्या करना चाहिए?
मृत्यु के बाद आत्मा को स्वतंत्र करना ही सच्ची श्रद्धा है। यदि आप अपने पूर्वजों से प्यार करते हैं, तो:
- उनकी फोटो को ऐसे स्थान पर न रखें जहाँ आपकी नजर बार-बार पड़े।
- उनसे और ईश्वर से उनके लिए क्षमा और शांति की प्रार्थना करें।
- उन्हें अपनी यादों और मोह से “आजाद” करें ताकि वे अपनी आध्यात्मिक यात्रा पूरी कर सकें।