Women wearing black sarees celebrating Makar Sankranti 2026.
मकर संक्रांति का पर्व हिंदू धर्म में विशेष स्थान रखता है। जहाँ सामान्यतः शुभ कार्यों में काले रंग को वर्जित या अशुभ माना जाता है, वहीं मकर संक्रांति (14 जनवरी 2026) के दिन काला रंग पहनना न केवल प्रचलित है, बल्कि इसे शुभ और वैज्ञानिक भी माना गया है।
आइए जानते हैं इस विरोधाभास के पीछे छिपे धार्मिक और वैज्ञानिक कारण:
हिंदू धर्म में आमतौर पर पूजा-पाठ या मांगलिक कार्यों में काले रंग से दूरी बनाई जाती है, क्योंकि इसे शोक या नकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है। लेकिन मकर संक्रांति एक ऐसा अपवाद है जहाँ महाराष्ट्र और उत्तर भारत के कई हिस्सों में लोग विशेष रूप से काले रंग के वस्त्र (जैसे काली साड़ी या कुर्ता) पहनते हैं।
इसके पीछे तीन प्रमुख कारण हैं:
1. वैज्ञानिक कारण: कड़ाके की ठंड और ऊष्मा का अवशोषण
मकर संक्रांति का पर्व जनवरी के मध्य में आता है, जब उत्तर भारत और मध्य भारत में कड़ाके की ठंड होती है।
- विज्ञान का तर्क: काला रंग ऊष्मा (Heat) का सबसे अच्छा अवशोषक (Absorber) माना जाता है। यह सूर्य की किरणों से गर्मी सोखकर शरीर को गर्म रखने में मदद करता है।
- स्वास्थ्य लाभ: पुराने समय में ठंड से बचने के लिए इस दिन काले वस्त्र पहनने की परंपरा शुरू हुई ताकि उत्सव के दौरान लोग बीमार न पड़ें और शरीर का तापमान संतुलित रहे।
2. ज्योतिषीय कारण: सूर्य और शनि का मिलाप
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, मकर संक्रांति वह दिन है जब सूर्य देव अपने पुत्र शनि देव की राशि (मकर) में प्रवेश करते हैं।
- शनि का रंग: काला रंग न्याय के देवता शनि देव का प्रिय रंग माना जाता है।
- संबंधों में सुधार: पौराणिक कथाओं के अनुसार, सूर्य और शनि के बीच मतभेद थे, लेकिन इस दिन सूर्य स्वयं अपने पुत्र से मिलने उनके घर आते हैं। इसलिए, इस दिन काला रंग पहनना पिता-पुत्र के प्रेम और शनि देव की प्रसन्नता का प्रतीक माना जाता है।
3. बुराई पर अच्छाई की जीत
एक अन्य मान्यता के अनुसार, मकर संक्रांति से दिन बड़े होने लगते हैं और रातें छोटी। काला रंग ‘अंधकार’ और ‘रात’ का प्रतीक है।
- परंपरा का अर्थ: इस दिन काला पहनकर हम उस जाड़े की ऋतु और अंधकार को सम्मानपूर्वक विदा करते हैं और सूर्य के प्रकाश (उत्तरायण) का स्वागत करते हैं। महाराष्ट्र में सुहागिन महिलाएं ‘बोर न्हाण’ और ‘हलदी-कुंकू’ के दौरान काली चंद्रकला साड़ी पहनती हैं, जो बुरी नजर से बचाने का भी प्रतीक मानी जाती है।
मकर संक्रांति 2026 पर क्या करें?
- तिल-गुड़ का महत्व: इस दिन तिल और गुड़ का सेवन करें। तिल शनि का प्रतीक है और गुड़ सूर्य का। इन दोनों का साथ मिलना जीवन में मिठास और शक्ति लाता है।
- स्नान और दान: पवित्र नदियों में स्नान करें और काली उड़द की दाल, कंबल या तिल का दान करें।
- पतंगबाजी: सूर्य की रोशनी में पतंग उड़ाना न केवल मनोरंजन है, बल्कि विटामिन-D प्राप्त करने का एक पारंपरिक तरीका भी है।
हिंदू धर्म एक “जीवन जीने की कला” है, जहाँ हर नियम के पीछे गहरा अर्थ है। मकर संक्रांति पर काला पहनना हमें सिखाता है कि समय और परिस्थिति के अनुसार ‘अशुभ’ भी ‘शुभ’ में बदल सकता है।