Soul leaving the body after an accident as per Garud Puran.
गरुड़ पुराण के अनुसार क्या यह सब पहले से तय है?
गरुड़ पुराण के अनुसार, एक्सीडेंट या आकस्मिक मृत्यु मात्र एक संयोग नहीं है। यह हमारे संचित कर्मों और प्रारब्ध का एक गहरा हिसाब-किताब है। इस विषय को विस्तार से समझाने के लिए यह रहा आपका ब्लॉग:
जब भी हम किसी सड़क हादसे या एक्सीडेंट की खबर सुनते हैं, तो अक्सर कहते हैं— “किस्मत खराब थी” या “भगवान की यही मर्जी थी।” लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि हर दिन लाखों लोग सड़कों पर चलते हैं, फिर किसी एक खास इंसान के साथ ही ऐसा क्यों होता है? क्यों कोई मामूली सी टक्कर में जान गंवा देता है और कोई भीषण हादसे के बाद भी बच निकलता है?
गरुड़ पुराण कहता है कि इस संसार में कुछ भी ‘अचानक’ नहीं होता। जो हमें आकस्मिक लगता है, वह वास्तव में हमारे कर्मों की एक लंबी श्रृंखला का अंतिम परिणाम होता है। आइए जानते हैं एक्सीडेंट और मृत्यु से जुड़े उन रहस्यों को, जो हमारी समझ से परे हैं।
1. सांसों का ईंधन और कर्मों का हिसाब
जैसे एक गाड़ी में जितना ईंधन होता है, वह उतनी ही दूर चलती है, वैसे ही इंसान की सांसें उसके कर्मों के अनुसार तय होती हैं। गरुड़ पुराण के अनुसार, आत्मा अपने साथ पिछले जन्मों का पूरा लेखा-जोखा लेकर आती है। यदि जीवन का पन्ना छोटा है, तो शरीर ज्यादा देर साथ नहीं निभा पाता। हम जिसे ‘अचानक आई मौत’ कहते हैं, वह केवल हमारे लिए अचानक होती है; ब्रह्मांड के नियमों में वह समय पहले से निश्चित होता है।
2. एक्सीडेंट: कारण नहीं, मात्र एक माध्यम
लोग सोचते हैं कि एक्सीडेंट की वजह से मृत्यु हुई, लेकिन सत्य यह है कि एक्सीडेंट केवल एक माध्यम (Medium) बनता है। जब किसी व्यक्ति के कर्मों का हिसाब पूरा हो जाता है, तो नियति उसे उस स्थान और उस पल तक खींच ले जाती है जहाँ उसका शरीर छूटना तय है। यही कारण है कि एक ही जगह पर मौजूद दो लोगों में से एक बच जाता है और दूसरा नहीं, क्योंकि दोनों के कर्मों का बोझ अलग-अलग होता है।
3. मृत्यु से पहले मिलने वाले संकेत
ब्रह्मांड कभी भी बिना चेतावनी के प्रहार नहीं करता। मृत्यु या किसी बड़े हादसे से पहले आत्मा को कई संकेत मिलते हैं:
- मन की बेचैनी: बिना कारण घबराहट होना।
- पूर्वाभास: परिवार के किसी सदस्य (जैसे माँ) का मन घबराना।
- बाधाएँ: रास्ते में वाहन का खराब होना या अचानक कोई रुकावट आना।अहंकारवश इंसान इन संकेतों को नजरअंदाज कर देता है, जबकि ये चेतावनियाँ हमें उस अनहोनी से बचाने के लिए होती हैं।
4. सामूहिक कर्म और अनचाहा हादसा
कई बार लोग पूछते हैं कि “वह तो बहुत अच्छा इंसान था, फिर उसके साथ ऐसा क्यों हुआ?” गरुड़ पुराण कहता है कि यह संसार सामूहिक कर्मों (Collective Karma) से भी चलता है। किसी और की लापरवाही, अहंकार या गलती का परिणाम कभी-कभी दूसरों को भी भुगतना पड़ता है। लेकिन अंततः, आत्मा को वही मिलता है जो उसके कर्मों के खाते में लिखा होता है।
5. अचानक मृत्यु के बाद आत्मा की स्थिति
गरुड़ पुराण के अनुसार, एक्सीडेंट में मरने वाली आत्माओं को सबसे अधिक पीड़ा होती है। इसका कारण यह है कि उन्हें ‘विदाई’ का समय नहीं मिलता। वे शरीर तो छोड़ देती हैं, लेकिन उनका मन संसार में ही अटका रहता है। वे अपने परिवार को रोते हुए देखती हैं, बोलना चाहती हैं, लेकिन उनकी आवाज किसी तक नहीं पहुँचती। अधूरे कर्मों और अधूरी इच्छाओं के कारण ऐसी आत्माएं अक्सर भटकती रहती हैं।
6. दुआएं बनती हैं ढाल: कैसे बदलें अपनी किस्मत?
गरुड़ पुराण केवल डराने के लिए नहीं, बल्कि सचेत करने के लिए है। यह कहता है कि जब तक सांस चल रही है, तब तक मौका है।
- भलाई के कार्य: किसी भूखे को खाना खिलाना या किसी कमजोर का साथ देना आपकी ‘मृत्यु की रेखा’ को हल्का कर सकता है।
- दुआओं की शक्ति: अक्सर बड़े हादसों से लोग इसलिए बच जाते हैं क्योंकि किसी की दी हुई ‘दुआ’ उनके आगे ढाल बनकर खड़ी हो जाती है।
मौत तय है, लेकिन मौत का रूप हमारे अपने हाथों में है। हम कैसे जिए, किसे दुख दिया और किसे सहारा दिया—यही तय करता है कि हमारी अंतिम सांस कैसी होगी। इसलिए मौत से नहीं, बल्कि अपने कर्मों से डरिए। आज का एक छोटा सा नेक काम आपके आने वाले कल की बड़ी आपदा को टाल सकता है।
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