Mystical representation of life after death and reincarnation cycle
हजारों सालों से इंसान के मन में एक सवाल सबसे ऊपर रहा है— “मरने के बाद क्या होता है?” क्या आत्मा हमेशा के लिए विदा हो जाती है, या वह किसी दूसरे लोक (परलोक) में जाकर वापस इस लोक (मृत्यु लोक) में लौट आती है? गरुड़ पुराण से लेकर आधुनिक ‘नियर डेथ एक्सपीरियंस’ (NDE) तक, हर जगह आत्मा के इस सफर के संकेत मिलते हैं। आज हम परलोक से इस लोक में आने वाली आत्मा के उन अनसुलझे रहस्यों की परतों को खोलेंगे, जिन्हें विज्ञान भी आज तक पूरी तरह नहीं समझ पाया है।
1. परलोक क्या है और आत्मा वहाँ क्यों जाती है?
धार्मिक ग्रंथों और आध्यात्मिक गुरुओं के अनुसार, ‘परलोक’ वह सूक्ष्म दुनिया है जहाँ आत्मा शरीर छोड़ने के बाद निवास करती है। इसे ‘पितृ लोक’, ‘स्वर्ग लोक’ या ‘नर्क लोक’ जैसे अलग-अलग नामों से जाना जाता है।
आत्मा ऊर्जा का वह रूप है जिसे न शास्त्र काट सकते हैं और न आग जला सकती है। जब आत्मा इस भौतिक शरीर को छोड़ती है, तो वह अपने साथ अपने कर्मों का लेखा-जोखा (Karmic Impressions) लेकर जाती है। परलोक में आत्मा का प्रवास उसके कर्मों की शुद्धि और अगले जन्म की तैयारी का समय होता है। लेकिन रहस्य तब गहराता है जब वही आत्मा दोबारा इस धरती पर, यानी ‘इस लोक’ में जन्म लेने के लिए लौटती है।
2. आत्मा के इस लोक में लौटने की प्रक्रिया: एक रहस्यमयी सफर
पुनर्जन्म या ‘Reincarnation’ के सिद्धांत के अनुसार, आत्मा का इस लोक में आना कोई इत्तेफाक नहीं है। यह एक सोची-समझी प्रक्रिया है जिसे ‘कर्म का चक्र’ (Cycle of Karma) संचालित करता है।
जन्म लेने का चुनाव
कहा जाता है कि उच्च चेतना वाली आत्माएं अपना अगला जन्म, अपने माता-पिता और अपनी परिस्थितियों का चुनाव खुद करती हैं। वे ऐसा इसलिए करती हैं ताकि वे अपने पिछले जन्म के अधूरे कार्यों को पूरा कर सकें या अपने कर्मों का भुगतान कर सकें।
विस्मृति का पर्दा (The Veil of Forgetfulness)
जब आत्मा परलोक से इस लोक में गर्भ के माध्यम से प्रवेश करती है, तो उस पर विस्मृति का एक पर्दा डाल दिया जाता है। यदि हमें पिछले जन्मों की सारी बातें याद रहें, तो इस जन्म को जीना असंभव हो जाएगा। लेकिन कई बार बच्चों में यह यादें धुंधली रूप में रह जाती हैं, जिसे विज्ञान ‘Past Life Memories’ कहता है।
3. विज्ञान और पुनर्जन्म: क्या कहते हैं शोधकर्ता?
हालाँकि विज्ञान आत्मा को नहीं मानता, लेकिन ‘Ian Stevenson’ जैसे वैज्ञानिकों ने हजारों ऐसे बच्चों पर शोध किया है जिन्हें अपने पिछले जन्म की बातें याद थीं।
- अनजान निशान (Birthmarks): कई मामलों में पाया गया कि बच्चे के शरीर पर जन्म से ही वैसे ही निशान थे, जैसे पिछले जन्म में उसकी मृत्यु के समय चोट के निशान थे।
- विदेशी भाषा बोलना (Xenoglossy): कुछ बच्चे बिना किसी ट्रेनिंग के ऐसी भाषाएँ बोलने लगते हैं जो उनके परिवार या परिवेश में कोई नहीं जानता। यह इस बात का सबूत माना जाता है कि आत्मा परलोक से अपनी पुरानी स्मृतियाँ साथ लेकर आई है।
4. क्यों कुछ आत्माएं जल्दी वापस आती हैं और कुछ को सदियां लग जाती हैं?
परलोक से वापसी का समय हर आत्मा के लिए अलग होता है। इसके मुख्य रूप से तीन कारण माने जाते हैं:
- अकाल मृत्यु (Unnatural Death): जिन लोगों की मृत्यु अचानक या किसी दुर्घटना में होती है, उनकी आत्माएं अपनी अधूरी इच्छाओं के कारण अक्सर बहुत जल्दी वापस लौटने की कोशिश करती हैं।
- गहरा मोह (Deep Attachment): परिवार या संपत्ति से अत्यधिक लगाव आत्मा को परलोक में टिकने नहीं देता और वह पुनः उसी परिवेश में जन्म लेने के लिए खिंची चली आती है।
- उच्च आध्यात्मिक उद्देश्य: कुछ महान आत्माएं या ‘सिद्ध पुरुष’ लोक-कल्याण के लिए स्वेच्छा से बार-बार इस लोक में जन्म लेते हैं।
5. कैसे पहचानें कि कोई आत्मा आपके आसपास है?
अक्सर लोग महसूस करते हैं कि उनके पूर्वज या कोई जानी-पहचानी आत्मा उनके आसपास है। आध्यात्मिक दृष्टि से इसके कुछ संकेत बताए गए हैं:
- अचानक खुशबू आना: बिना किसी इत्र या फूल के अचानक किसी विशेष सुगंध का महसूस होना।
- तापमान में बदलाव: कमरे के तापमान का अचानक बहुत ठंडा या गर्म हो जाना।
- सपनों के माध्यम से संपर्क: आत्माएं अक्सर सपनों का उपयोग संचार के माध्यम के रूप में करती हैं क्योंकि उस समय हमारा चेतन मन शांत होता है।
6. पुनर्जन्म के चक्र से मुक्ति: मोक्ष का मार्ग
हिंदू धर्म और बौद्ध धर्म के अनुसार, परलोक से इस लोक में आने-जाने का यह सिलसिला तब तक चलता रहता है जब तक आत्मा को ‘मोक्ष’ प्राप्त नहीं हो जाता। जब इंसान अपने सभी कर्मों का हिसाब बराबर कर लेता है और उसे यह ज्ञान हो जाता है कि वह शरीर नहीं बल्कि आत्मा है, तब वह इस ‘आवागमन’ के चक्र से मुक्त होकर परमात्मा में लीन हो जाता है।
परलोक से इस लोक में आने वाली आत्मा का रहस्य आज भी विज्ञान और अध्यात्म के बीच की एक कड़ी है। जहाँ विज्ञान सबूत मांगता है, वहीं अध्यात्म अनुभव की बात करता है। लेकिन एक बात निश्चित है—हमारा यह जीवन महज सत्तर-अस्सी सालों का सफर नहीं है, बल्कि एक अनंत यात्रा का छोटा सा हिस्सा है। हम यहाँ कुछ सीखने, कुछ चुकाने और अपनी चेतना को ऊपर उठाने आए हैं।