Mystery of Mount Kailash
दुनिया में कई ऐसी जगहें हैं जो अपनी खूबसूरती के लिए जानी जाती हैं, लेकिन तिब्बत के पठार पर स्थित कैलाश पर्वत दुनिया का इकलौता ऐसा स्थान है जो अपनी सुंदरता से ज्यादा अपने अनसुलझे रहस्यों के लिए प्रसिद्ध है। हिंदू, बौद्ध, जैन और बोन धर्म के लिए यह पर्वत ब्रह्मांड का केंद्र माना जाता है।
लेकिन क्या यह केवल एक पहाड़ है? या यह किसी उन्नत सभ्यता द्वारा बनाया गया एक विशाल ‘पिरामिड’ है? आखिर क्यों यहाँ समय की गति तेज हो जाती है और क्यों आज तक कोई भी इंसान इसकी चोटी पर नहीं पहुँच सका? आइए इस रहस्यमयी यात्रा पर चलते हैं जहाँ धर्म, अध्यात्म और विज्ञान का मिलन होता है।
1. ब्रह्मांड का केंद्र: एक्सिस मुंडी (Axis Mundi)
दुनिया भर के वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं का मानना है कि कैलाश पर्वत पृथ्वी का ‘एक्सिस मुंडी’ है। एक्सिस मुंडी यानी वह धुरी जहाँ धरती और आकाश का मिलन होता है। रूसी वैज्ञानिकों के एक अध्ययन के अनुसार, कैलाश पर्वत पूरी दुनिया का केंद्र है।
हैरानी की बात यह है कि कैलाश पर्वत से उत्तरी ध्रुव (North Pole) की दूरी 6666 किलोमीटर है और ठीक उतनी ही दूरी (6666 किलोमीटर) यहाँ से इंग्लैंड के ‘स्टोनहेंज’ (Stonehenge) की भी है। वहीं दक्षिणी ध्रुव (South Pole) से इसकी दूरी ठीक 13332 किलोमीटर है। क्या यह महज एक गणितीय इत्तेफाक है या प्राचीन काल में किसी ने इसे जानबूझकर इस तरह चुना था?
2. समय का रहस्य: जहाँ घड़ियाँ भी मात खा जाएं
कैलाश पर्वत के सबसे डरावने और रहस्यमयी पहलुओं में से एक है— ‘टाइम डाइलैशन’ (Time Dilation)। यहाँ जाने वाले यात्रियों और वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि कैलाश के पास पहुँचते ही समय की गति तेज हो जाती है।
- नाखून और बालों का बढ़ना: कैलाश की परिक्रमा करने वाले कई लोगों ने अनुभव किया है कि जो नाखून और बाल सामान्य रूप से 15-20 दिनों में बढ़ते हैं, वे यहाँ मात्र 12 घंटों में उतने ही बढ़ जाते हैं।
- उम्र का बढ़ना: ऐसा महसूस होता है जैसे आपका शरीर सामान्य से कहीं अधिक तेजी से ‘एज’ (Age) कर रहा है। आज तक आधुनिक विज्ञान इस बात का सटीक कारण नहीं बता पाया है कि इस क्षेत्र में समय की आवृत्ति (Frequency) इतनी अलग क्यों है।
3. एक विशाल मानव निर्मित पिरामिड?
कैलाश पर्वत की आकृति किसी साधारण पर्वत जैसी नहीं है। इसकी चारों दिशाएं कंपास की सुइयों की तरह सटीक हैं। रूसी वैज्ञानिकों ने अपनी रिसर्च में दावा किया था कि कैलाश पर्वत प्राकृतिक नहीं है, बल्कि यह एक विशालकाय पिरामिड है जो 100 छोटे पिरामिडों से घिरा हुआ है।
इसकी बनावट और इसके चारों ओर की ऊर्जा को देखते हुए यह कहा जाता है कि यह एक ‘कॉस्मिक कंप्यूटर’ या ‘पॉवर प्लांट’ हो सकता है जिसे लाखों साल पहले किसी दिव्य शक्ति या उन्नत सभ्यता ने स्थापित किया था।
4. कोई क्यों नहीं चढ़ पाया कैलाश की चोटी पर?
दुनिया की सबसे ऊँची चोटी माउंट एवरेस्ट (8848 मीटर) पर अब तक 7000 से ज्यादा लोग चढ़ चुके हैं, लेकिन उससे लगभग 2000 मीटर कम ऊँचे कैलाश पर्वत (6638 मीटर) पर आज तक कोई भी नहीं चढ़ पाया।
- अदृश्य शक्ति का अहसास: जिन्होंने भी चढ़ने की कोशिश की, उन्होंने बताया कि जैसे-जैसे वे ऊपर जाते हैं, उनका मन भटकने लगता है और दिशा का ज्ञान खत्म हो जाता है।
- मौसम का अचानक बदलना: कैलाश अपनी मर्जी से रास्ता देता है। चढ़ाई शुरू करते ही अचानक बर्फीला तूफान या रास्ता गायब हो जाना यहाँ आम बात है।
- धार्मिक मान्यता: हिंदू मान्यता के अनुसार, यहाँ भगवान शिव अपनी अर्धांगिनी पार्वती के साथ निवास करते हैं। एक जीवित मनुष्य अपने भौतिक शरीर के साथ भगवान के निवास स्थान पर बिना अनुमति के प्रवेश नहीं कर सकता।
5. मानसरोवर और राक्षस ताल का रहस्य
कैलाश के चरणों में दो झीलें हैं, जो दुनिया की सबसे अनोखी झीलें मानी जाती हैं:
- मानसरोवर झील: यह दुनिया की सबसे ऊँची ताजे पानी की झील है। इसका आकार सूर्य जैसा (गोल) है। यह शांति और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है। कहा जाता है कि सुबह के ‘ब्रह्म मुहूर्त’ में यहाँ आकाश से दिव्य प्रकाश पुंज उतरते हैं जिन्हें देवता माना जाता है।
- राक्षस ताल: मानसरोवर के बगल में ही खारे पानी की यह झील है जिसका आकार चंद्रमा (क्रिसेंट) जैसा है। यहाँ का पानी स्थिर है और इसके आसपास कोई भी जीव-जंतु या वनस्पति नहीं पाई जाती। यह नकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक मानी जाती है।
ये दोनों झीलें जीवन के दो पहलुओं— ‘सृजन’ और ‘विनाश’ को दर्शाती हैं।
6. हवाओं में गूँजती ‘ॐ’ और ‘डमरू’ की ध्वनि
कैलाश पर्वत के पास जाने पर यात्रियों को अक्सर एक खास तरह की ध्वनि सुनाई देती है। वैज्ञानिक कहते हैं कि यह बर्फ के पिघलने और हवाओं के टकराने की आवाज हो सकती है, लेकिन भक्तों का मानना है कि यह साक्षात ‘ॐ’ की ध्वनि और भगवान शिव के डमरू की आवाज है। यदि आप ध्यान लगाकर सुनें, तो यहाँ की शांत वादियों में एक गूँज महसूस होती है जो सीधे आपके हृदय को छूती है।
7. क्या कैलाश पर्वत एक ‘स्टारगेट’ है?
कुछ आधुनिक विचारकों और प्राचीन अंतरिक्ष यात्री सिद्धांतकारों (Ancient Astronaut Theorists) का मानना है कि कैलाश पर्वत एक ‘Stargate’ या पोर्टल है। यह एक ऐसी जगह है जहाँ से दूसरे आयामों (Dimensions) या दूसरे लोकों में जाना संभव है। यहाँ होने वाली असामान्य रोशनी की घटनाएं और दिशा-भ्रम इस बात की ओर इशारा करते हैं कि यहाँ की भौतिकी (Physics) हमारी दुनिया से अलग है।
कैलाश पर्वत केवल पत्थर और बर्फ का ढेर नहीं है। यह एक जीवित पुस्तकालय है जिसमें ब्रह्मांड के न जाने कितने राज दफन हैं। चाहे आप इसे भगवान शिव का घर कहें या ऊर्जा का एक विशाल केंद्र, कैलाश हमें याद दिलाता है कि मनुष्य की समझ अभी भी प्रकृति के रहस्यों के सामने बहुत छोटी है। जो लोग यहाँ जाते हैं, वे वापस तो आते हैं, लेकिन वे वही इंसान नहीं रहते जो वे जाने से पहले थे। उनकी आत्मा पर कैलाश की अमिट छाप हमेशा के लिए रह जाती है।
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