Amarkantak temple decorated for Narmada Jayanti 2026.
नर्मदा नदी भारत की पांच प्रमुख नदियों में से एक है, लेकिन इसकी महिमा निराली है। जहाँ गंगा को ‘स्वर्ग की नदी’ माना जाता है, वहीं नर्मदा को ‘शिव की पुत्री’ और धरती की सबसे पवित्र नदी कहा जाता है।
1. नर्मदा जयंती 2026: तिथि और मुहूर्त
- सप्तमी तिथि प्रारंभ: 24 जनवरी 2026, रात 10:15 बजे से
- सप्तमी तिथि समाप्त: 25 जनवरी 2026, रात 08:30 बजे तक
- विशेष संयोग: आज रथ सप्तमी भी है, इसलिए आज के दिन नर्मदा स्नान का फल अक्षय (कभी न खत्म होने वाला) माना गया है।
2. प्राकट्य की अद्भुत कथा
पुराणों के अनुसार, जब भगवान शिव अमरकंटक में कठोर तपस्या कर रहे थे, तब उनके शरीर से निकले स्वेद (पसीने) की बूंदों से एक तेजस्वी कन्या प्रकट हुई। इस कन्या ने अपनी सुंदरता और चंचलता से शिव का मन मोह लिया, इसलिए उन्होंने इसका नाम ‘नर्मदा’ (नर्म-आनंद, दा-देने वाली) रखा।
- अविनाशी वरदान: नर्मदा ने शिव से वरदान मांगा था कि प्रलय के समय भी उनका अस्तित्व समाप्त न हो, इसलिए माना जाता है कि दुनिया खत्म होने पर भी नर्मदा बहती रहेगी।
3. नर्मदा के ‘उलटा’ बहने का रहस्य
भौगोलिक रूप से, भारत की अधिकांश नदियाँ पूर्व की ओर बहकर बंगाल की खाड़ी में गिरती हैं, लेकिन नर्मदा पूर्व से पश्चिम की ओर बहकर अरब सागर में मिलती है।
- आध्यात्मिक कारण: लोक कथाओं के अनुसार, अपने प्रेम (सोनभद्र) के विश्वासघात से आहत होकर नर्मदा ने आजीवन कुंवारी रहने और विपरीत दिशा में बहने का संकल्प लिया था। यह उनकी ‘स्वाधीनता’ और ‘दृढ़ इच्छाशक्ति’ का प्रतीक है। [Will Power संदर्भ]
4. कंकड़-कंकड़ शंकर: नर्मदेश्वर शिवलिंग
नर्मदा ही एकमात्र ऐसी नदी है जिसके तल से निकलने वाला हर पत्थर स्वयं सिद्ध शिवलिंग होता है। इसे ‘नर्मदेश्वर शिवलिंग’ कहा जाता है। इसे प्राण-प्रतिष्ठा की आवश्यकता नहीं होती क्योंकि यह माँ नर्मदा के स्पर्श से पहले ही जागृत हो चुका होता है।
आज के दिन क्या करें? (Practical Tips)
- अभिषेक और दर्शन: यदि आप नर्मदा तट (जैसे ओंकारेश्वर, भेड़ाघाट या अमरकंटक) के पास हैं, तो आज दीपदान अवश्य करें। यदि दूर हैं, तो घर में नर्मदेश्वर शिवलिंग का पंचामृत से अभिषेक करें।
- नर्मदा अष्टकम: आज शंकराचार्य रचित “नर्मदाष्टकम” (सबिंदु सिन्धु सुस्खलत्तरंग भंग रंजितम…) का श्रवण करें। यह मानसिक शांति के लिए अचूक है।
- मौन और ध्यान: जैसा कि हमने Aura और मौन के बारे में चर्चा की, नर्मदा तट की ऊर्जा आपके आभामंडल को तुरंत स्थिर कर देती है। आज शांत रहकर अपनी आंतरिक ऊर्जा पर ध्यान दें। [Magnetic Aura संदर्भ]
नर्मदा जयंती हमें सिखाती है कि पवित्रता केवल बाहर नहीं, भीतर होनी चाहिए। माँ नर्मदा की तरह अपनी जड़ों (शिव/अध्यात्म) से जुड़े रहें और विपरीत परिस्थितियों में भी अपना रास्ता खुद बनाना सीखें।